Wednesday, January 30, 2019

परमधर्म संसद का फैसला- राम मंदिर के लिए बसंत पंचमी से अयोध्या कूच, 21 फरवरी को शिलान्यास

कुंभ में बुधवार को परमधर्म संसद के आखिरी दिन यह फैसला किया गया कि 21 फरवरी को अयोध्या में राम मंदिर के लिए शिलान्यास किया जाएगा। इससे पहले 10 फरवरी को बसंत पंचमी से साधु-संत प्रयागराज से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। इस फैसले से जुड़े धर्मादेश पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने दस्तखत किए। उनकी अध्यक्षता में ही तीन दिन परमधर्म संसद हुई।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा, ‘‘मंदिर तोड़ने वाली सरकार राम मंदिर का निर्माण नहीं करा सकती। इसलिए हम 21 फरवरी को अयोध्या में भगवान राम के भव्य राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। बसंत पंचमी (10 फरवरी) के बाद हम संत प्रयागराज से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। इसके लिए हमें गोली भी खानी पड़े, तो पीछे नहीं हटेंगे। जिस तरह सिखों के गुरु गोविंद सिंह ने देश के करोड़ों हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना बलिदान दिया था, ठीक उसी तरह महाराजश्री जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्मादेश जारी किया है। सबसे आगे महाराजश्री चलेंगे।’’

विश्व हिंदू परिषद भी कराएगी धर्म संसद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘‘जिस तरह गली-गली शंकराचार्य हो गए हैं, उसी तरह गली-गली धर्मसंसद हो रही है। यह अब नहीं चलेगा। धर्मसंसद करने का अधिकार शंकराचार्य का है। सनातन धर्मी लोगों का नेतृत्व आरएसएस नहीं करेगा। शंकराचार्य हमारे नेता हैं। हम सनातनधर्मी अपने गुरुओं के चरण में अपना सिर रखते हैं।’’

उन्होंने कहा कि हम किसी कानून का उल्लंघन नहीं कर रहे। चार शिलाओं को उठाने के लिए चार लोग चाहिए। चार लोगों के चलने से कोई कानून नहीं टूटता। जिस तरह अंग्रेजों का नमक का कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च किया गया था, उसी तरह शंकराचार्य ने रास्ता दिखाया है। उनके नेतृत्व में चार लोग राम मंदिर निर्माण के लिए घरों से निकलेंगे। हम भगवान राम के नाम पर मार भी सहेंगे, क्योंकि वह भगवान का प्रसाद होगा।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की
लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने मंगलवार को अयोध्या मामले में बड़ा कदम उठाया था। उसने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर मांग की कि अयोध्या की गैर-विवादित जमीनें उनके मूल मालिकों को लौटा दी जाएं। 1991 से 1993 के बीच केंद्र की तत्कालीन पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने विवादित स्थल और उसके आसपास की करीब 67.703 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में इस पर यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश दिए थे।

2.77 एकड़ परिसर के अंदर है विवादित जमीन
अयोध्या में 2.77 एकड़ परिसर में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद है। इसी परिसर में 0.313 एकड़ का वह हिस्सा है, जिस पर विवादित ढांचा मौजूद था और जिसे 6 दिसंबर 1992 को गिरा दिया गया था। रामलला अभी इसी 0.313 एकड़ जमीन के एक हिस्से में विराजमान हैं। केंद्र की अर्जी पर भाजपा और सरकार का कहना है कि हम विवादित जमीन को छू भी नहीं रहे।

Tuesday, January 22, 2019

华为孟晚舟事件:美国将“提出引渡” 外交官公开信促释放加拿大人

加拿大传媒日前引述加拿大驻美国大使消息指,美国将向加拿大政府提出将中国通讯科技公司华为(Huawei)首席财务官孟晚舟引渡到美国受审,但没有透露美国会在甚么时候提出要求。

中国外交部发言人华春莹周二(1月22日)回应称,“我们敦促加方立即释放孟晚舟女士,切实保障她的合法权益。我们也强烈敦促美方立即纠正错误,撤销对孟晚舟的逮捕令,不向加方提出正式引渡要求。”

此外,逾140名前任和现任政客、学者和外交官周一发出联署信,呼吁中国立即释放康明凯和斯帕弗。签署信件的包括两名美国前驻华大使骆家辉(Gary Locke)和温斯顿•洛德(Winston Lord)、英国前驻华大使韩魁发(Christopher Hum)、前港督彭定康(Chris Patten)等。

加拿大《环球邮报》(Globe and Mail)周一(1月21日)引述麦诺顿(David MacNaughton)指,他早前多次就孟晚舟的案件与美国白宫和国务院高级官员会面,并多次向对方表达加拿大的“愤怒和不满”,因为美国要对孟晚舟执法,过程却令多名加拿大人“受到惩罚”。

根据加拿大法律,美国必须在孟晚舟被捕后60天内向加拿大提出引渡申请,限期将在1月30日届满。

加拿大当局去年12月应美国要求,在孟晚舟于温哥华转机时将她拘捕,指她所在的公司因涉嫌违反美国对伊朗制裁条例而被调查。中国之后拘留多名在华加拿大人,包括前外交官康明凯(Michael Kovrig)和商人斯帕弗(Michael Spavor),指他们从事“危害中国国家安全活动”,被视为中方对孟晚舟被捕的报复。

由超过140名现任政客、学者和外交官联合署名的公开信指,康明凯和斯帕弗一直都致力建立中国与世界其他国家的沟通桥梁,此类交流是全球学术研究和外交工作的基本组成部份,而中国当局扣留康明凯和斯帕弗,向世界传递出“这样的建设性工作在中国不受欢迎”的信息。

法新社引述联署信其中一名发起人德国墨卡托中国研究中心(Mercator Institute for China Studies)学者韦登费尔德(Jan Weidenfeld)的话称,信件是要向中国表示,它现在这种处理事情的手法会令其他国家疏离中国。

韦登费尔德说,联署信尤其是要对中国“任意”处理事情的手法表达忧虑。他对法新社说,外界目前“不知道中国是否跟随规则行事”,无人可确定自己或同事会不会成为下一个受害者